तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई Lyrics | छत्तीसगढ़ी जस गीत | CG Jas Lyrics
तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई – छत्तीसगढ़ी जस गीत
गीत - तोर डंडा शरण पखारवगायक -अरुण यादवम्यूजिक कंपनी - के के पंचारे जस भजनवेबसाइट -www.cgjaslyrics.comवेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2
उड़ान - अऊ जय कंकालिन दाई मोर करबे माता सहाई
तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2
अंतरा -1
देवलोक में मातेश्री तै पहली साज सजाये वो,पहली साज सजाये वो
छत्तीस कोटि देवता धामी तोला माथ नवाये वो,तोला माथ नवाये वो
रक्तबीज दानव ला मार के काली रूप चिहाये वो,काली रूप चिहाये वो
कालरात्रि तोर रूप हर जेघरी परलय मचाये वो,जेघरी परलय मचाये वो
उड़ान - तोर आरती मैंहा उतारव वो जय कंकालिन दाई-2
तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2
अंतरा -2
रिस भन्नागे मातेश्री के थर थर कापत आये वो,थर थर कापत आये वो
अइसे अक्छीर माता होही कहिके जोखा मनाये वो,कहिके जोखा मनाये वो
तबले दाई कंकालिन तै खाव खाव चिल्लाये वो,खाव खाव चिल्लाये वो
पान फूल नरियर ला धरके देवी तोला मनाये वो,देवी तोला मनाये वो
उड़ान - तोर सुरता के दियना बारव वो जय कंकालिन दाई -2
तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2
अंतरा -3
दिन बहुरागे कलजुग आगे देवी हां चरित दिखाये वो देवी हां चरित दिखाये
छत्तीसगढ़ के डीही डोंगरी में जाके माता थिराये वो जाके माता थिराये वो
कहु बम्लाई कहु समलाई शारदा बनके छाये वो शारदा बनके छाये
अउ समय समय में अपन भगत ल तैहा दरश दिखाए वो तैहा दरश दिखाए वो
उड़ान - तोर प्रेम ला सुन्दर तारव वो जय कंकालिन दाई -2
तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2
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गीत का अर्थ
इस गीत में भक्त माँ कंकालिन दाई की शरण में जाकर उनका आशीर्वाद मांगता है। गीत में देवी के काली स्वरूप, रक्तबीज जैसे असुरों के वध और भक्तों की रक्षा का वर्णन किया गया है। साथ ही यह बताया गया है कि माँ समय-समय पर अपने भक्तों को दर्शन देकर उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
गीत की विशेषता
माँ कंकालिन दाई की महिमा का सुंदर वर्णन।
छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति की मधुर प्रस्तुति।
देवी के काली और करुणामयी दोनों स्वरूपों का वर्णन।
नवरात्रि एवं जस कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त गीत।
सरल भाषा और गहरे भक्ति भाव से भरपूर।
कथा
लोक मान्यता के अनुसार माँ कंकालिन दाई आदिशक्ति का एक तेजस्वी स्वरूप हैं। जब अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब माता अपने उग्र रूप में दुष्टों का संहार करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं। छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में माँ कंकालिन दाई के मंदिर स्थित हैं, जहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और माता की कृपा प्राप्त करते हैं। यह गीत उसी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।
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